जहां शब्द मायने नहीं रखते भाव अहम हो जाते है....
Thursday, October 17, 2013
25 जून को हुई तेज बरसात में केरवा डेम से लौटते हुए प्रेमपुरा घाट पर देखा कि भुट्टे बेचने वाला एक दंपत्ति कुछ इस तरह से बरसात से बच रहा था। फिर क्या था कार रोकी छाता निकाला और साथी जितेन्द्र को कहा कि छाता संभाल। बरसात इतनी तेज थी और हवा तो माने सब कुछ उड़ा ले जाने के फिराक में थी। दोनों ही पूरे गीले हो गए लेकिन जो फोटो बना वो सामने है। इंटरनेशनल कंपनी व्यू बग ने इसे बेस्ट फोटो का तमगा देते हुए आनलाइन आक्शन के लिए भी रखा है।
Wednesday, July 17, 2013
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